Marathi

श्री कृष्णाष्टक स्तोत्रं
पालयाच्यत
ु पालयाजित पालया कमलालय।
लीलया धत
ृ भूधरांबुरुहोदर स्विनोदर ॥ ध्रुव ॥
मध्वमानसपद्मभानस
ु मं स्मर प्रतत संस्मर
जस्नग्धतनममलशीतकांततलसन्मुखं करुणोन्मुखं।
हृद्यकंबुसमानकंधरमक्षयं दरु रतक्षयं
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अगंदाददसुशोभभपाणणयुगेन संक्षुभभत्यॆनसं
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जस्नग्धसंस्तत
ु रूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ १ ॥
तंग
ु माल्यमणींद्रहारसरोरसं खलनीरसं।
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मंगलप्रदमंथदामववराजितम भिताजितं
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तं गण
ृ े वररूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ २ ॥
पीनरम्यतनूदरं भि हे मनः शभ
ु हे मनः
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स्वानभ
ं मं
ु ावतनधशमनाय ददशंतमर्थम सश
ु त
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आनतोऽजस्म तनिािामनवप्रयसाधकं खलबाधकं
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हीनतोजझित रूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ३ ॥
है मककंककणणमाभलकारसनांर्ितं तमवंर्ितं
रत्नकांिनवस्त्रर्ित्रकदटं घनप्रभया घनं।
कम्रनागकरोपमोरुमनामयं शभ
ु धीमयं
नौम्यहं वररूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ४ ॥
वत्ृ तिानम
ु नोज्ञिंघममोहदं परमोहदं
रत्नकल्पनखजत्वषा हृतहृत्तमस्तुततमुत्तमं।
प्रत्यहं रर्ितािमनं रमया स्वया गतया स्वयं
र्ित्त र्िंतय रूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ५ ॥
िारुपादसरोियुग्मरुिामरोच्ियिामरो
दारमध
म भारमंडलरं िकं कभलभंिकं।
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वीरतोर्ितभूषणं वरनूपुरं स्वतनूपुरं
शव
ु ाददमनॊऽततदरू तरागमॊत्सवदागमं
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सत्कवींद्रविॊववलासमहॊदयं मदहतॊदयं।
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धारयात्मतन रूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ६ ॥
लक्षयाभम यतीश्वरै ः कृतपि
ू नं गण
ु भािनं
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धीकृतॊपमरूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ७ ॥
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नारदवप्रयमाववशांबरुहे क्षणं तनिरक्षणं
तारकोपमिारुदीपियांतरे गतर्िंतरे ।
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धीर मानस पण
म ंद्रसमानमच्युतमानम
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द्वारकोपमरूप्यपीठकृतालयं हररमालयं ॥ ८ ॥
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रूप्यपीठकृतालयस्य हरे ः वप्रयं दरु रतावप्रयं
तत्पदािमकवाददराियतीररतं गण
ु परू रतं।
गोप्यमष्टकमेतदच्ु िमुदे मम जस्त्वहतनममम
प्राप्य शद्ध
ु फलाय तत्र सक
ु ोमलं हृतधीमलं ॥ ९ ॥
॥ इतत श्री मद्वाददरािपझ
ू यिरण ववरर्ितं श्री कृष्णाष्टक स्तोत्रं
संपूण॥
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॥ भारतीरमण मख्
ु यप्राणांतगमत श्री कृष्णापमणमस्तु ॥