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॥ श्री गुरुभ्यॊ नमः ॥
॥ अथ दशावतार स्तुततः ॥
॥ श्री लक्ष्मी हयग्रीवाय नमः ॥
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[ अश्व धाटी ]
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ऒ ं मत्सस्याय नमः
ou
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प्रॊष्ठीश ववग्रह सतु नष्ठीवनॊद्धृतववशशष्टांबच
ु ाररजलधॆ
कॊष्ठांतराहहतववचॆष्टागमौघपरमॆष्ठीडित त्सत्सवमव माम ।
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प्रॆष्ठाककसूनुमनुचॆष्टाथक मात्समववदतीष्टॊ युगांतसमयॆ
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स्थॆष्ठात्समशग
ं ृ धत
ृ काष्ठांबुवाहन वराष्टापदप्रभतनॊ ॥ १ ॥
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ऒ ं श्री हयग्रीवाय नमः खंिीभवद्बहुलडिंिीरजभ
ं ृ ण सुचंिी कृतॊ दधध
महा कांिातत धचत्र गतत शौंिाद्य है मरद भांिा प्रमॆय चररत ।
चंिाश्वकंठमद शुंिाल दर्ह
ु कदय गंिा शभखंिाकर दॊ- श्चंिा मरॆ शहय
तंि
ु ाकृतॆ दृशम खंिा मलं प्रहदश मॆ ॥ २ ॥
ऒ ं कूमाकय नमः कूमाककृतॆ त्सववतु नमाकत्सम पष्ृ ठधत
ृ भमाकत्सम मंदर
धगरॆ धमाकवलंबन सुधमाक सदाकशलत शमाक सुधाववतरणात ।
दम
ु ाकन राहुमुख दम
ु ाकतय दानवसम
ु माक शभभॆदन पटॊ घमाककक कांतत वर
वमाक भवान भव
ु न तनमाकण धत
ू ववकृततः ॥ ३ ॥
ऒ ं धन्वंतरॆ नमः
धन्वंतरॆ ग
ं रुधच धन्वंतरॆ ऽररतरु धन्वंस्तरीभवसुधा- भान्वंतरावसथ
om
मन्वंतराधधकृत तन्वंतरौषधतनधॆ ।
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धन्वंतरं गशग
ु ुधन्वंतमाजजशवु व तन्वन्ममाजधध तनया
ou
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ऒ ं श्री नारायणायै नमः
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सन्
ू वंतकात्समर्हदतन्वंतरावयव तन्वंतराततकजलधौ ॥ ४ ॥
याक्षीरवाधधकमदनाक्षीणदपकहदततजाक्षॊशभतामरगणा
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पॆक्षाप्तयॆऽजतनवलक्षांशबु बंबजजदतीक्ष्णालकावत
ृ मुखी ।
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सूक्षमावलग्नवसनाऽऽक्षॆपकृत्सकुच कटाक्षाक्षमीकृतमनॊ
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दीक्षासुरार्हतसुधाऽक्षाणणनॊऽऽवतु सरू
ु क्षॆक्षणाद्धररतनुः ॥ ५ ॥
ऒ ं श्री नारायणायै नमः
शशक्षाहदयुज्ञगम दीक्षासुलक्षण परीक्षाक्षमाववधधसती दाक्षायणी
क्षमतत साक्षाद्रमावपनय दाक्षॆपवीक्षणववधौ ।
प्रॆक्षाक्षक्षलॊभकरलाक्षार सॊक्षक्षत पदाक्षॆपलक्षक्षतधरा साऽक्षाररतात्समतनु
भूक्षारकाररतनहट लाक्षाऽक्षमानवतु नः ॥ ६ ॥
ऒ ं श्री वराहाय नमः
नीलांबुदाभशभ
ु शीलाहद्रदॆ हधर खॆलार्हतॊदधधधुनी शैलाहदयुक्त
तनणखलॆला कटाद्यसुर तूलाटवीदहन तॆ ।
om
कॊलाकृतॆ जलधध कालाचयावयव नीलाधजदं ष्र धररणी
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ऒ ं श्री नरशसंहाय नमः
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लीलास्पदॊरुतलमल
ू ाशशयॊधगवरजालाशभवंहदत नमः ॥ ७ ॥
दं भॊशलतीक्ष्णनख संभॆहदतॆद्रं ररपु कंु भींद्र पाहह कृपया स्तंभाभक
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कासहनडिंभाय दत्सतवर गंभीर नाद नह
ृ रॆ ।
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अंभॊहदजानुसरणांभॊजभूपवन कंु भीन सॆश खगराट कंु भींद्र कृजत्सतधर
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जंभारर षण्मुख मुखांभॊरु हाशभ नुत मां ॥ ८ ॥
ऒ ं श्री वामनाय नमः
वपंगाक्ष ववक्रम तरु ं गाहद सैन्य चतरु ं गा वशलप्त दनज
ु ा सांगा ध्वरस्थ
बशल सांगावपात र्हवषतांगा मराशलनत
ु तॆ ।
शग
ं ृ ार पादनख तुंगाग्रशभन्न कन कांगांिपातत तहटनी तुंगातत मंगल
तरं गा शभभूत भज कांगाघ वामन नमः ॥ ९ ॥
ऒ ं श्री वामनाय नमः
ध्यानाहक वामन तनॊनाथ पाहह यजमाना सुरॆशवसुधा दानाय
याचतनक लीनाथक वाग्वशशत नानासदस्य दनुज ।
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मीनांक तनमकल तनशानाथ कॊहटल समानात्सम मौंजजगण
ु कौ पीनाच्छ
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ऒ ं श्री परशरु ामाय नमः
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सूत्रपद यानात पत्रकर कानम्यदं िवरभत
ृ ॥ १० ॥
धैयाांबुधॆ परशच
ु याकधधकृत्सतखल वयाकवनीश्वर महा शौयाकशभभूतकृत
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वीयाकत्समजातभुज वीयाकवलॆपतनकर ।
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भायाकपराधकुवपतायाकज्ञयागशलतनायाकत्सम सूगल तरॊ
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कायाकऽपराधमववचायाकयक मौघजतय वीयाकशमता मतय दया ॥ ११ ॥
ऒ ं श्री रामाय नमः
श्रीरामलक्ष्मणशक
ु ाराम भूरवतुगौरामलाशमतमहॊ हारामरस्तुत
यशॊरामकांततसत
ु नॊरामलधधकलह ।
स्वारामवयकररपु वीरामयाधधककर चीरामलावत
ृ कटॆ स्वाराम
दशकनजमारामयागतसुघॊरामनॊरथहर ॥ १२ ॥
ऒ ं श्री रामाय नमः श्रीकॆशवप्रहदशनाकॆश जातकवपलॊकॆश भग्नरववभू
स्तॊकॆतराततकहरणाकॆवलातकसख
ु धीकॆकककालजलद ।
साकॆतनाथवरपाकॆरमुख्यसुत कॊकॆन भजक्तमतुलां राकॆंद ु बबंबमुख
om
काकॆक्षणापह र्हषीकॆश तॆऽं तिकमलॆ ॥ १३ ॥
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ऒ ं श्री रामाय नमः
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रामॆनण
ृ ां र्हदशभरामॆनराशशकुल भीमॆमनॊद्यरमतां
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गॊमॆहदनीजतयतपॊऽमॆयगाधधसत
ु कामॆतनववष्ट मनसी ।
श्यामॆ सदा त्सवतयजजतामॆय तापसज रामॆ गताधधकसमॆ
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भीमॆशचापदलनामॆयशौयकजजत वामॆ क्षणॆ ववजतयनी ॥ १४ ॥
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ऒ ं श्री सीतास्वरूवपणै श्रीयै नमः
कांतारगॆहखल कांतारटद्वदन कांतालकांतकशरं
कांतारऽऽयाऽंंबज
ु तन कांतान्ववायववधु कांताश्मभाहदपहरॆ ।
कांताशललॊलदल कांताशभशॊशभततल कांताभवंतमनस
ु ा
कांतानय
क ट कांतारमात्सववतु मां ॥ १५ ॥
ु ानजजत कांतारदग
ु क
ऒ ं श्री रामाय नमः
दांतं दशानन सुतांतं धरामधधवसंतं प्रचंि तपसा क्लांतं समॆत्सय
वववपनांतं त्सववाप यमनंतं तपजस्व पटलम ।
यांतं भवारतत भयांतं ममाशु भगवंतं भरॆ ण भजतात स्वांतं सवारर
om
दनुजांतं धराधरतनशांतं स तापसवरम ॥ १६ ॥
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ऒ ं श्री रामाय नमः
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शंपाभचापलव कंपास्त शतब
ृ ल संपाहदताशमतयशाः शं पाद तामरस
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संपातत नॊऽल मनु कंपार सॆन हदशमॆ ।
संपातत पक्षक्ष सहजंपाप रावण हतं पावनं यद कृथा त्सवां पाप कूप
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पतत तं पाहह मां तदवप पंपा सरस्त टचर ॥ १७ ॥
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ऒ ं श्री रामाय नमः
लोलाक्श्यपॆक्षक्षतसुलीलाकुरं गवद खॆलाकुतूहल गतॆ
स्वालापभशू मजतनबालापहायकनज
ु पालाद्यभॊ जय जय ।
बालाजग्नदग्धपुर शालातनलात्समजतन फालात्सतपत्सतलरजॊ
नीलांगदाहदकवप मालाकृताशलपथ मल
ू ाभ्यतीत जलधॆ ॥ १८ ॥
ऒ ं श्री रामाय नमः
तूणीरकामुक
क कृपाणीककणांकभुज पाणी रववप्रततमभाः
क्षॊणणधराशलतनभ घॊणी मख
ु ाहदघनवॆणीसरु क्षणकरः ।
शॊणणभवन्नयन कॊणी जजतांबुतनधध पाणी ररताहकणमणी
om
श्रॆणीवत
ृ ांतिररह वाणीशसूनुवर वाणीस्तुतॊ ववजयतॆ ॥ १९ ॥
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ऒ ं श्री रामाय नमः
ou
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हुंकारपूवम
क थटं कारनादमतत पंकाऽवधायक चशलता
लंकाशशलॊच्चयववशंका पततिदरु शंकासयस्य धनष
ु ः ।
लंकाधधपॊमनुतयंकालराबत्रशमव शंकाशताकुलधधया तंकालदं िशत
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संकाशकामुख
क शरांकाजन्वतं भज हररं ॥ २० ॥
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ऒ ं श्री रामाय नमः
धीमानमॆयतनध
ं लदनामा रमाकमलभू कामाररपन्नगप
ु ामाऽऽतकमग
कामाहह वैररगरु
ु सॊमाहदवंद्य महहम ।
स्थॆमाहदनापगत सीमाऽवतात्ससखल सामाज रावणररपू रामाशभदॊ
हरररभौमाकृततः प्रतन सामाहद वॆदववषयः ॥ २१ ॥
ऒ ं श्री रामाय नमः
दॊषाऽत्समभूवशतुराषािततक्रमज रॊषात्समभतव
क ृ चस
पाषाणभत
ू मतु नयॊषावरात्समतनव
ु ॆशाहददातयचरणः ।
नैषाधयॊवषधसुभॆषाकृदं िजतन दॊषाचराहद सुर्हदॊ
om
दॊषाग्रजन्ममतृ तशॊषापहॊऽवतु सुदॊषांतिजातहननात ॥ २२ ॥
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
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वंद
ृ ावनस्थपशु वंद
ृ ावनं ववनुत वंद
ृ ारकैकशरणं नंदात्समजं तनहत तनंदा
ou
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कृदा सरु जनंदामबद्ध जठरम ।
वंदामहॆ वयम मंदावदातरुधच मंदाक्षकाररवदनं कंु दाशलदं तमुत
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कंदाशसतप्रभतनुंदावराक्षसहरम ॥ २३ ॥
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
गॊपालकॊत्ससवकृतापारभक्ष्यरस सूपान्नलॊपकुवपता
शापालयावपतलयापांबद
ु ाशलसशललापायधाररतधगरॆ ।
सापांगदशकनजतापांग रागयुत गॊपांग नांशक
ु र्हतत व्यापार
शौंिववववधापाय तस्त्सवमव गॊपाररजातहरण ॥ २४ ॥
ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
कंसाहदकासदवतंसा वनीपततववहहंसाकृतात्समजनुषं संसारभूतशमह
संसारबद्धमन संसारधचत्ससख
ु तनम
ु ।
संसाधयंतमतनशंसाजत्सवकव्रजमहं सादरं भत भजॆ
om
हं साहदतापसरररं सास्पदं परमहं साहद वंद्य चरणम ॥ २५॥
a.
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः राजीव नॆत्रववदरु ाजीवमामवतु राजीव कॆतनवशं
वाजीभपजत्सतनप
ृ राजी रथाजन्वतज राजीव गवकशमन ।
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वाजीशवाहशसत वाजीश दै त्सय तनु वाजीश भॆदकरदॊ- जाकजीकदं बनव
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
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राजीव मख्
ु यसम
ु राजीसव
ु ाशसतशशरः ॥ २६ ॥
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कालीर्हदावसथ कालीयकंु िशलप कालीस्थपादनखरा व्यालीनवांशक
ु र
वाशलगणारुणणत कालीरुचॆ जय जय ।
कॆलीलवापर्हत कालीशदत्सतवर नालीकदृप्तहदततभू
चल
ू ीकगॊपमहहलालीतनघ
ू सण
ू ीकणांकर्हदय ॥ २७ ॥
ृ धल
ऒ ं श्री कृष्णाय
नमः कृष्णाहद पांिुसुत कृष्णा मनःप्रचुर तष्ृ णा सुतजृ प्तकरवाक
कृष्णांकपाशलरत कृष्णाशभधाघहर कृष्णाहदषण्महहल भॊः ।
पुष्णातु मामजजत तनष्णाद वाधधकमद
ु नुष्णांशु मंिल हरॆ जजष्णॊ
धगरींद्र धर ववष्णॊ वष
ृ ावरज धष्ृ णॊ भवान करुणया ॥ २८ ॥
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
मारतात हदशमॆ माधवांतिकमले ।
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रामाशशरॊमणणधरामासमॆतबलरामानुजाशभधरततं व्यॊमासुरांतकर तॆ
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कामातकभौमपुर रामावशलप्रणय वामाक्षक्षपीततनुभा
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ऒ ं श्री कृष्णाय नमः
ou
si
भीमाहहनाथमख
ु वैमातनकाशभनत
ु भीमाशभवंद्य चरण ॥ २९ ॥
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स्वक्ष्वॆलभक्ष्यभय दाक्षक्षश्रवॊ गणज लाक्षॆपपाशयमनं लाक्षगह
ृ ज्वलन
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रक्षॊ हहडिंबबक भैक्षान्नपूववक वपदः ।
अक्षानब
ु ंधभवरूक्षाक्षरश्रवण साक्षान्महहष्यवमती
कक्षानुयानमधमक्ष्मापसॆवनमभीक्ष्णापहासमसतां ॥ ३० ॥
चक्षाण ऎवतनज पक्षाग्रभूदशशताक्षात्समजाहद सुर्हदा
माक्षॆपकाररकुनप
ृ ाक्षौहहणीशतबलाक्षॊभदीक्षक्षतमनाः ।
ताक्ष्याकशसचापशरतीक्ष्णाररपूवतक नज लक्ष्माणणचाप्यगणयन
वक्ष
ु ततः ॥ ३१ ॥
ृ ालयध्वजरररक्षाकरॊ जयतत लक्ष्मीपततयकदप
ऒ ं श्री बुद्धाय नमः, ऒ ं श्री कजककनॆ नमः
बुद्धावतारकवव बद्धानुकंपकुरु बद्धांजलौ मतय दयां शौद्धॊदतनप्रमुख
सैद्धांततका सुगम बौद्धागमप्रणयन ।
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कृद्धाहहतासर्ह
ु ततशसद्धाशसखॆटधर शद्ध
ु ाश्वयानकमला शद्ध
ु ांतमांरुधचवप
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ऒ ं श्री बदरी नारायण नमः
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नद्धाणखलांग तनज मद्धाऽव ककक्यशभध भॊः ॥ ३२ ॥
सारं ग कृजत्सतधर सारं ग वाररधर सारं ग राजवरदा सारं ग दाररतर
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सारं ग तात्सममद सारं गतौषधबलं ।
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सारं ग वत्सकुसुम सारं गतं च तव सारं ग मांतियग
ु लं सारं ग वणकमप
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सारं ग ताधजमद सारं ग हदंस्त्सवमव माम ॥ ३३ ॥
मंगळा चरण
ग्रीवास्य वाहतनु दॆ वांिजाहददश भावाशभराम चररतं भावाततभव्यशभ
ु
दीवाहदराजयतत भव
ू ाजग्वलास तनलयं ।
श्रीवागधीशमुख दॆ वाशभनम्य हररसॆवाचकनॆषु पठता- मावास
ऎवभववताऽवाग्भवॆतरसुरावासलॊकतनकरॆ ॥ ३४ ॥
॥ इतत श्रीमद्वाहदराजपूज्यचरण ववरधचतं श्रीदशावतारस्तुततः संपूणां
॥
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a.
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om
॥ भारतीरमणमख्
ु यप्राणांतगकत श्रीकृष्णापकणमस्तु ॥