॥ दर् ु गासूक्तम ॥ ओम जगतवेदसे सुनवगम सोम मरगतीयतो ननदहगनत वेद: । स न: परशदनत दर् ु गाणि ववश्वग नगवेव ससन्धम ु दरु रतगत्यग्नन: ॥ तगमग्ननविगाम तपसग ज्वलन्तीीं वैरोचनीम कमाफलेशु om जश्ु टगम । a. c दर् ु गाम दे वीनम शरिमहम प्रपद्ये सुतरसस तरसे नम: ॥ अनने त्वम पगरयग नव्यो अस्मगन्वस्वग्स्तसतरनत दर् ु गाणि ववश्वग । ou si gm पूश्च प्रुववी बहुलग न उवी तवग तोकगय तनयगय शम्यो: ॥ ववश्वगनन नो दर् ु :ा जगतवेद: ससन्धुन्न नगवग दरु रतगनतपरसश । .y अनने अत्रिवन्मनसग ग्रि ु गनोस्मगकम बोध्यववतग तनन ू गम ॥ w w w प्रुतनग ग्जतनम सहमगनमग्र ु मग्नननम हुवेम परमगवसधस्थगत । स न: परशदनत दर् ु गाणि ववश्वग क्शगमद्देवो अनत दरु रतगत्यग्नन: ॥ प्रत्नोसश कमीड्यो अध्वरे शु सनगच्च होतग नव्यश्च सग्त्स । स्वगन्चगनने तनुवम वपप्रयस्वगस्मभ्य च सौतर्मगयजस्व ॥ र्ोसतजश्ुा टमयुजो ननसशक्तम तवेन्र ववश्िोरनुसम्चरे म । नगकस्य प्रुश्ठमसत सम्वसगनो वैश्िवीम लोक इह मगदयन्तगम ॥ ओम कगत्यगयनगय ववद्महे कन्यकुमगरर धीमहह । तन्नो दर्ु र्ा: प्रचोदयगत ॥ w w w .y ou si gm a. c om ओम शगग्न्त: शगग्न्त: शगग्न्त:
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