॥ भाग्य सूक्तम ॥ तैत्तरीय ब्राह्मणम, अश्टकम - २, प्रश्नह - ८, अनव ु ाक्य - ९ ओम प्रातर अग्ग्नम प्रातर इन्द्रग्म हवामहे य प्रातर ममत्रा वरुणा प्रातर अग्श्वना । om प्रातर भग्म पूशणम ब्रह्मणस्पततम प्रातस्सोममुत रुरग्म हुवेम ॥ १ ॥ a. c प्रातर ग्ितम भगमुग्रग्म हुवेम वयम पुत्र-मदितेयो ववधताा । आद्ध्रग्श्िद्ध्यम मन्द्यमानस्तरु ग्श्िरािा चिद्ध्यम भगम भक्शीत्याह gm ॥ २ ॥ ou si भग प्रणेत-भाग सत्यराधो भगेमाम चधयमि ु वििन्द्नह । भगप्रणो िनय गोमभ-रश्वैभग ा प्रन्रमु भ-न्रुव ा न्द्तस्स्याम ॥ ३ ॥ .y उतेिानीम भगवन्द्तस स्यामोत प्रवपत्व उत मध्ये अह्नाम । w उतोदिता मघवन थ्सूयस् ा य वयम िे वानाग्म सुमतौ स्याम ॥ ४ ॥ w w भग एव भगवाग्म अस्तु िे वास्तेन वयम भगवन्द्तस स्याम । तम त्वा भग सवा इज्िोहवीमम सनो भग परु एता भवेह ॥ ५ ॥ समध्वरायोशसो अनमन्द्त िचधक्रावेव शि ु ये पिाय । अवाािीनम वसवु विम भगन्द्नो रथममवाश्वाग्िन आवहन्द्तु ॥ ६ ॥ अश्वावती-गोमतीना उशासो वीरवतीस्सि-मुच्छन्द्तु भराह । घत ु ाना ववश्वतह प्रपीनायय ू म पात स्वग्स्तमभस्सिा नह ॥ ७ ॥ ृ म िह यो मा अग्नेय भाचगनग्म सन्द्त-मथाभागम चिकीरुशतत । अभागमग्नेय तम कुरु मामग्नेय भाचगनम कुरु ॥ ८ ॥ w w w .y ou si gm a. c om ओम शाग्न्द्तह शाग्न्द्तह शाग्न्द्तदह ॥
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